Monday, May 03, 2010

कुछ कहें तो . . .

कृपया बतलाएं आखिर क्या है यह ग्लोबल वार्मिंग और कौन है इसका ज़िम्मेदार ? शायद आप ही हमें समझा पाएं ताकि हम उस कबूतर को कम से कम इस भारी भरकम शब्द का आसान सा मतलब बतला सकें। उसे उसकी भाषा में समझा सकें कि भईया यह होती है ग्लोबल वार्मिंगा और तुम इस तरह प्रभावित होते हो। क्या आप बतला सकते हैं कि आप किस-किस तरह से इसका असर झेल रहें हैं। शायद कबूतर के साथ कुछ अपने सहचर भी जाग जाएं। आपके जवाब के इंतज़ार में आपका रवीन्द्र।

2 comments:

Arun said...

इसे हिंदी में वैश्विक गर्मी कह सकते हैं. यानी धरती का तापमान तेजी से बढ़ रहा है कि बाहर निकलना सभी का मुश्किल हो रहा है. पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सभी तो इस तेज धूप से प्रभावित हैं.

रवीन्द्र गोयल् said...

पर क्या आप यह भी बता सकते हैं कि यह वैश्विक गर्मी हो क्यों रही है और धरती का तापमान बढ क्यों रहा है ? आप लिखते हैं कि सबका बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है जबकि हम तो जितना समझते हैं वो लोग धड्ल्ले से जब चाहे, जहां चाहे घूमते हैं और छोड जाते हैं अपनी एयरकंडीशंड गाडियों से निकलने वाला धूंआं जो कम से कम हमारे मौहल्ले की गर्मी तो बढा ही जाते हैं। इनके पास तो बिज़लरी का साफ, मीठा और कीटाणु रहित पानी भी नहीं होता। इनके नलों से तो आज भी कभी सांप, कभी बिच्छू और कभी दूसरी तरह के जीवाणु निकल जाते हैं।